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Last Updated on 5 months by Jinny Taylor

     खुशदिल लोग ज्यादा सफल होते है | कामयाबी की राह



एक दार्शनिक किसी काम से बाहर जा रहे थे | रस्ते में टेक्सी वाले को बुझा –सा  चेहरा देखकर पूछा , क्यों भाई बीमार हो ? यह सुनकर टेक्सी वाला बोला क्या आप डाक्टर है ?
दार्शनिक ने कहा , नहीं , पर तुम्हारा चेहरा तुम्हे थका हुआ और बीमार बता रहा है | टेक्सी वाला ठंडी आह भरते हुए बोला , हाँ , आजकल पीठ में बहुत दर्द होता है |  उम्र पूछने पर बताया की वह २६ साल का है | सुनकर दार्शनिक ने कहा , इतनी कम उम्र में पीठ दर्द ? यह तो बिना दवा के ठीक हो सकता है , थोडा व्यायाम किया करो | लेकिन थोड़ी देर तक कुछ सोचने के बाद दार्शनिक  ने फिर से पूछा , क्यों भाई आजकल क्या धंधे में कडकी चल रही है ?
टेक्सी वाला चोंका , साहब , आपको मेरे बारे में इतना कुछ कैसे मालुम है ?
क्या आप कोई ज्योतिष है ? दार्शनिक ने मुस्कुराते हुए कहा , नहीं | लेकिन तुम्हारे बारे में में ही क्या कोई भी ये बाते बता देगा | टेक्सी वाला हैरान होकर बोला , भला ऐसे कैसे कोई  भी मेरे बारे में सब कुछ बता देगा ? इस पर दार्शनिक बोले , जब तुम हर वक्त बुझे हुए निस्तेज चेहरे से सवारियों का स्वागत करोगे , तो भला कौन तुम्हारी टेक्सी में बैटना चाहेगा ? इस तरह आमदनी अपनेआप कम होती जाएगी | आमदनी कम होने से तुम्हे गुस्से के साथ –साथ सुस्ती का भी अहसास होगा |  यह सारी बाते सुनकर टेक्सी वाला बोला , बस सर , आज आपने मुझे मेरी गलती का अहसास करा दिया है | आज से में अपनी कमियों को दूर करके अपने अन्दर उत्साह का संचार करूँगा |
इस घटना के लगभग चार – पांच साल बाद एक दिन एक सज्जन ने उन दार्शनिक की पीठ पर हाथ रखते हुए मुस्कुरा कर कहा , सर कैसे है ?
दार्शनिक बोले ठीक हु बेटा , पर मैंने तुम्हे पहचाना नहीं | इस पर सज्जन बोले , सर में वही टैक्सी वाला  हूँ जिसे आपने उत्साह और मुस्कराहट का पाठ पढाया था |
आपकी शिक्षा के ही कारण आज में एक बड़ी टैक्सी एजेंसी का मालिक हूँ | अब में भी हर उदास व्यक्ति को मुस्कुराते हुए काम करने की सलाह देता हु |
जिंदगी में उत्साह और मुस्कुराहट का होना बहुत जरुरी है | उत्साह बिगड़े हुए काम को भी बना देता है | वही उदासीन और थका हुआ चेहरा बने बनाए हुए काम को भी बिगाड़ने में भूमिका निभाता है |
आज धेर्य और सहनशीलता की कमी के कारण हम अपनी असफलता का कारण इधर उधर खोजते है |
जबकि असफलता का कारण हमारे अन्दर ही छिपा है | काम कठिन हो या सरल ,किन्तु अगर उसे उत्साह के साथ किया जाए , तो वह न केवल समय से पहले पूरा होता है , बल्कि अच्छी तरह से पूरा होता है |
कई बार जब हमारा काम करने का दिल नहीं होता है अथवा हम उस काम की करते उत्साह नहीं दिखाते तो वह काम कठिन और बोरियत लगता है |
कई लोग अपने जीवन में उच्च पद प्राप्त कर लेते है , जबकि कई लोग साधारण स्तर तक ही पहुँच पाते है |
इसके पीछे यह भी यही कारण होता है | जो तय मंजिल तक नहीं पहुँच पाते है , उनमे उत्साह का अभाव होता है | यदि हर व्यक्ति सुबह उठते ही अपने अन्दर उत्साह का संचार करे और मन में यह संकल्प करे की आज का दिन उसके लिए अत्यंत शुभ है | और आज वह अपने अनेक महत्वपूर्ण कामो को पूरा करेगा तो वास्तव में वह ऐसा कर लेगा |

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